Sunday, May 15, 2011

चिड़ीमार से संरक्षणवादी बनने का सफ़र

 दो दिन पहले एक ऐसे ब्यक्ति से मिलने का अवसर मिला. जिससे मिलने के बाद पता लगा कि जिस ब्यक्ति से मैं मिल रहा हूँ वह ब्यक्ति एक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शख्सियत है. यह ब्यक्ति एकदम सीधा-सादा सा था. जब मुझे इस ब्यक्ति के बारे में पता लगा तो मैं दंग रह गया. यह ब्यक्ति विदेशों में भी अपने हुनर के जलवे बिखेर चुका है. जिसकी चर्चा देश के मीडिया में ही नहीं विदेशों में भी होती रहती है. द टेलीग्राफ अख़बार ने भी इनके द्वारा किये जा रहे संरक्षण के कार्यों को जमकर सराहा है. यह शख्स कभी परिंदों का शिकार किया करता था. अपने जीवन में दो लाख से अधिक परिंदों का शिकार कर चुका यह ब्यक्ति अब पक्षी विशेषज्ञ के रूप में जाना जाता है.   है ना अजीबो गरीब कहानी. एक शिकारी अब पक्षी विशेषज्ञ बन गया. चलिए आपको इस शख्स की वह कहानी सुनाता हूँ जो मुझे पता लगी .....     

        कहानी जिम कॉर्बेट से मिलती जुलती सी है. यह शख्स बिहार के बेगुसराय के रहने वाले हैं. इनका नाम है मोहम्मद अली हसन. यह जनाब आज से ३२ साल पहले तक पक्षियों का शिकार किया करते थे. इन्होने दो लाख से अधिक परिंदे पकडे या मार दिए. ३२ साल पहले तब इनकी मुलाकात मशहूर पक्षी विशेषज्ञ सलीम अली से हुयी, वहां से इनकी जिंदगी में बदलाव आ गया. पक्षियों का यह जानी दुश्मन उनसे बेपनाह मोहब्बत करने लगा. अली हसन ने अब अपनी पूरी जिंदगी इन पक्षियों की सेवा में लगा दी है.

        ३२ साल पहले के इस शिकारी के पक्षी पकड़ने के हुनर को जब सलीम अली ने देखा तो वह इससे काफी प्रभावित हुवे. वह इन्हें अपने साथ भरतपुर ले गए. जहाँ से बाद में यह लोग मुंबई गए. जहाँ सलीम अली ने इन्हें  बोम्बे नेचुरल हिस्टरी सोसिटी का सदस्य बना दिया. तब से लेकर अब तक अली पक्षियों के संसार के खूबसूरत पहलू को देखने और समझने में लगे हुए हैं. अली हसन से मेरी मुलाकात रामनगर में हुयी यहाँ यह बी एन एच एस की टीम के साथ गिद्धों के बारे में अध्ययन करने आये हुवे थे. अली ने मुझे बताया कि इस काम से उन्हें पैसा तो कुछ खास नहीं मिलता लेकिन उन्हें जो ख्याति इससे मिली है इससे वह संतुष्ट हैं, और उनके बच्चे भी यही चाहते हैं कि वह इस काम को करते रहे. आज भी अली पक्षियों को ट्रेप करते हैं, लेकिन अब उनका यह ट्रेप पक्षियों को हानि पहुंचाने के लिए नहीं बल्कि उनके कल्याण के लिए होता है. अली में एक बच्चे की सी सरलता है उन्होंने बताया कि किस तरह से एक अमेरिकन ने उनसे ट्रेपिंग के गुर सीखे, और बाद में वह उन्हें अमेरिका ले गया. जहाँ उन्होंने कई पक्षियों को ट्रेप किया. आज अली हसन अपने काम से प्रसन्न हैं. अली को करीब पांच सौ पेड़-पौधों और पक्षियों के नाम जुबानी याद हैं. अपने विदेश यात्रा के दौरान वह जिन शहरों में गए उनके नाम तो वह ऐसे बताते हैं, जैसे कोई बच्चा पहाड़े रट रहा हो. किसी दौर में चिड़ीमार रहा यह ब्यक्ति आज उन बेजुबानो का सच्चा हमदर्द है. अली हसन हमारे लिए तो किसी हीरो से कम नहीं, साथ ही वह हमारे प्रेरणास्रोत भी हैं. अली के इस काम को हमारा सलाम.
        

4 comments:

  1. पाटनी जी मेरी भी इनसे मुलाकात हुयी थी. यार क्या लाजवाब काम है बन्दे का. मेने तो इनपर "संवेदनाओं ने कातिल को बना डाला रहनुमा" करके १ स्टोरी भी फाइल की है. राष्टिर्ये सहारा ke liye ..

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  2. Prernaspad. Ek aur Balmiki ka uday. ...Jankari ke liye aabhar.

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  3. जैसा की अली ने बताया कि इस काम से उन्हें पैसा तो कुछ खास नहीं मिलता,लेकिन अब इस काम से वह संतुष्ट हैं,क्योकि आज के समय मे बहुत कम लोग होगे,जो पैसो के लिये नही बल्कि अपने निस्वार्थ जज्बे से संरक्षण के कार्यो मे लगे है.
    हालाकि बहुत से NGO अन्या स्वय सेवी सगठन भी इन कार्यो मे लगे है,जिनमे से अधिकतर केवल पैसा बनाने मे ही मस्त है.वास्तव मे कार्यो व विचारो से अली हसन हमारे लिए तो किसी हीरो से कम नहीं, साथ ही वह हमारे प्रेरणास्रोत भी हैं.

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