Sunday, September 12, 2010

अनसुलझी पहेली

रामनगर के बसई गाँव में २९ अप्रैल २०१० को देहरादून से आई, एस टी एफ की टीम ने एक तेंदुए की खाल बरामद की थी. इस खाल की बरामदगी में एक खास बात थी.यह खाल एक वनकर्मी आनंद सिंह नेगी के गौशाला से बरामद हुयी थी.यह वनकर्मी वन विकास निगम में कार्यरत है. एस टी एफ और पुलिस ने यह कह कर वनकर्मी को छोड़ दिया क़ि वह इस मामले में बेक़सूर है. पुलिस ने इस मामले में वनकर्मी और उसके परिवार से पूछताछ की और उसे लगा क़ि वनकर्मी निर्दोष है. पुलिस का मानना है क़ि यह खाल वनकर्मी की गौशाला में किसी ने रख कर पुलिस को सूचना दी थी. यह षड़यंत्र वनकर्मी को फ़साने के उद्देश्य से रचा गया था. पुलिस की कहानी में कोई पेंच नज़र नहीं आ रहा है. जिस तरह से यह पूरा मामला सामने आया उसे देख और सुन कर यह समझ में आता है क़ि मामला वनकर्मी को फ़साने के लिए ही रचा गया था. इस मामले में वनकर्मी को फ़साने की साजिश दिखाई देती है. मामले में वनकर्मी से पूछताछ के बाद जो समझ में आया उससे तो यही लगता है, क़ि कोई उसे फ़साना चाहता है, कारण भी स्पष्ट है लेकिन वह कारण हम यहाँ सिधान्तों के चलते स्पष्ट नहीं कर सकते. इस खाल की बरामदगी से कुछ ही दिन पहले भी रामनगर पुलिस को सूचना दी गयी थी क़ि उस गौशाला में आपत्तिजन सामग्री है. पुलिस को यह  सूचना एक गुमनाम फोन काल से मिली थी तो पुलिस ने वहां छापा मारा था लेकिन तब पुलिस को वहां कुछ भी आपत्तिजन नहीं मिला था. फिर पुलिस के आला आधिकारियों को गुमनाम काल जाने शुरू हुए. तो एस टी एफ की एक टीम ने वनकर्मी की गौशाला में छापा मारा.और वहां से खाल बरामद कर ली. सूत्रों क़ि यदि माने तो इसमे मजे की बात यह है क़ि वनकर्मी के घर खाल की सूचना स्थानीय पत्रकारों को भी षड्यंत्रकर्ता ने भिजवाई. लेकिन पत्रकारों ने अपनी सीमाओं की बाध्यता बता कर उस सूचना को दरकिनार किया था.
                                                        वनकर्मी की गौशाला से  बरामद खाल

       पुलिस ने  वनकर्मी को इस पूरे मामले में निर्दोष माना है. अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है क़ि यह खाल वनकर्मी के गौशाला में किस ने रखी. कौन है वनकर्मी के खिलाफ षडयन्त्रकाऱी, क्या पुलिस को वनकर्मी से पूछताछ के बाद उसका पता नही चला. २९ अप्रैल को खाल की बरामदगी के बाद पुलिस ने शीघ्र ही काल डिटेल निकालकर षड्यंत्रकारी को पकड़ने की बात कही थी. लेकिन ६ महीने का समय होने को है और पुलिस इस पूरे मामले में जांच आधिकारियों को ही बदलती रही है. पुलिस की जांच पहले रामनगर कोतवाली के एस आई प्रताप सिंह नेगी से यह कह कर वापस ले ली गयी क़ि वनकर्मी भी नेगी ही है और दोनों की जाति एक होने से जांच प्रभावित हो सकती है. फिर इसकी जांच कालाढूंगी थाने के एस आई विनोद यादव को दी गयी, फिर उससे भी जाच वापस लेकर उसी थाने के एस ओ, एन बी भट्ट को दे दी गयी. अफ़सोस तो यह है क़ि तीन तीन जाँच अधिकारी बदले जाने के बाद आज तक इस मामले का पर्दाफास नहीं हो पाया है. इस पूरे मामले में तराई पश्चिमी वन प्रभाग के तत्कालीन ड़ी एफ ओ, पी. के. पात्रो का कहना था क़ि उनकी सबसे बड़ी चिंता यह है क़ि आखिर जिस लेपोर्ड की खाल बरामद हुयी है यह गुलदार मारा कहाँ गया था?. इसे मारा किसने था.? कौन है जो यहाँ इस तरह से दुर्लभ वन्यजीवों को मार रहा है.? और वन्यजीवों के अंगों की तस्करी में लगा हुआ है. इस पूरे मामले का खुलासा पुलिस द्वारा शीघ्र किया जाना चाहिए. उधर छोटी छोटी बातों पर दिल्ली तक हल्ला मचाने वाले एन जी ओ की इस पूरे मामले में चुप्पी भी वन्यजीव प्रेमियों को साल रही है, ले दे कर इस मामले में बाघ बचाओ संघर्ष समिति ने पुलिस के सी ओ का घेराव कर अपने कर्तब्य की इतिश्री कर ली. यदि पुलिस की कहानी पर विश्वास करें क़ि यह पूरा मामला वनकर्मी को फ़साने की साजिस है तो इसका आरोपी इसका वन्यजीव अधिनियम के साथ-साथ एक निर्दोष को इस मामले में फ़साने के कुकर्त्य का भी अपराधी है. क्या कॉर्बेट पार्क के आस-पास कोई बड़ा गिरोह वन्य जीव अंगों की तस्करी में लगा है.? जो सरेआम किसी भी निर्दोष को फ़साने की क्षमता रखते हैं.यह तो अपराधी या अपराधियों के पकड़ आने के बाद ही पता चल पायेगा. पर स्थानीय पुलिस वन्यजीव अपराध में ६ महीने का इंतज़ार करती नज़र आ रही है. जिससे वह पूरे प्रकरण में फायनल रिपोर्ट लगा कर मामले को हमेशा के लिए ठन्डे बस्ते में डाल सके.पुलिस के पास वह फ़ोन नंबर मौजूद होगा जिस नंबर से उन्हें फ़ोन कर खाल होने की जानकारी दी गयी थी लेकिन बावजूद इसके अब तक तो पुलिस के हाथ कुछ नहीं लगा है. जिससे वन्यजीव प्रेमी आहत हैं.अब पुलिस कब तक उन काल डिटेल को निकल उन अपराधियों  तक पहुचेगी यह कोई नहीं जानता. या कभी वह अपराधी पुलिस की गिरफ्त में भी आ पाएंगे   यह भी अब बहुत बड़ा सवाल है.

10 comments:

  1. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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  2. बन्य जीव बचाने का अच्छा प्रयास|

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  3. ब्लाग जगत की दुनिया में आपका स्वागत है। आप बहुत ही अच्छा लिख रहे है। इसी तरह लिखते रहिए और अपने ब्लॉग को आसमान की उचाईयों तक पहुंचाईये मेरी यही शुभकामनाएं है आपके साथ
    ‘‘ आदत यही बनानी है ज्यादा से ज्यादा(ब्लागों) लोगों तक ट्प्पिणीया अपनी पहुचानी है।’’
    हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

    मालीगांव
    साया
    लक्ष्य

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  4. वाईल्ड लाईफ क्राईम को रोकना तो दूर पुलिस उसमे शामिल अपराधियों को पकड़ने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाती है पुलिस इसे वन विभाग की जिम्मेदारी बताकर खुद ही जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करती है यही कारण है कि रामनगर के बसई गाँव में वन कर्मी की गौशाला से बरामद तेंदुए की खाल के मामले में भी पुलिस हाथ-पे-हाथ रखे बैठी है,वनकर्मी को फ़साने के लिए उसकी गौशाला में किसने तेंदुए की खाल रखी?और उस साजिशकर्ता के पास ये खाल कहाँ से आई? इन सभी बातो से पर्दा उठना जरूरी था,वो जो भी था लेकिन दो-दो अपराधो का गुनाहगार है पहला तो वह तेंदुए की खाल रखने पर वाईल्ड लाईफ क्रिमिनल है दूसरा वह एक निर्दोष को झूठे केस में फ़साने की कोशिश कर रहा था,ऐसे दोहरे अपराधी का बेनकाब होना जरूरी है,ऐसा माना जा रहा है कि पुलिस ने उसकी पहचान भी कर ली है लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं की,घटना को बीते लम्बा समय हो गया है अब लगता नहीं कि पुलिस इस केस वर्क आउट कर पाएगी,बेहतर तो यही होता कि पुलिस जब इस केस को वर्क आउट करने फेल है तो वह इसे वन विभाग को ही ट्रांसफर कर देती,शायद वन विभाग ही इस केस को वर्क आउट कर देती. खुशाल सिह रावत

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  5. वाईल्ड लाईफ क्राईम को रोकना तो दूर पुलिस उसमे शामिल अपराधियों को पकड़ने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाती है पुलिस इसे वन विभाग की जिम्मेदारी बताकर खुद ही जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करती है यही कारण है कि रामनगर के बसई गाँव में वन कर्मी की गौशाला से बरामद तेंदुए की खाल के मामले में भी पुलिस हाथ-पे-हाथ रखे बैठी है,वनकर्मी को फ़साने के लिए उसकी गौशाला में किसने तेंदुए की खाल रखी?और उस साजिशकर्ता के पास ये खाल कहाँ से आई? इन सभी बातो से पर्दा उठना जरूरी था,वो जो भी था लेकिन दो-दो अपराधो का गुनाहगार है पहला तो वह तेंदुए की खाल रखने पर वाईल्ड लाईफ क्रिमिनल है दूसरा वह एक निर्दोष को झूठे केस में फ़साने की कोशिश कर रहा था,ऐसे दोहरे अपराधी का बेनकाब होना जरूरी है,ऐसा माना जा रहा है कि पुलिस ने उसकी पहचान भी कर ली है लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं की,घटना को बीते लम्बा समय हो गया है अब लगता नहीं कि पुलिस इस केस वर्क आउट कर पाएगी,बेहतर तो यही होता कि पुलिस जब इस केस को वर्क आउट करने फेल है तो वह इसे वन विभाग को ही ट्रांसफर कर देती,शायद वन विभाग ही इस केस को वर्क आउट कर देती. खुशाल सिह रावत

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  6. जब पुलिस के अफसर लोग सब कुछ जानकर भी अनजान बने रहेंगे तो कैसे गुलदार के हत्यारे पकड़ में आयेंगे ? गुलदार बाघ तो छोड़ो ... अरे पाटनी साहब .असली इंसान का भी कतल हो जाये तो ये मुए पुलिस वाले कभी किसी को पकड़ने की कोशिश करते हैं क्या ? वन्य प्राणी तो वैसे भी पुलिस की प्राथमिकता में नहीं आते .. अब आप खामखाँ परेशां हो कि गुलदार जो मर गया ..पुलिस उसकी गुथी को सुलझाये ! क्या पुलिस को पता नहीं है कि असल मसला क्या है ?? शायद कभी कभी सब कुछ जन बुझकर भी अनजान बनना पड़ता है ..गुलदार तो मर गया ..अब जो जिन्दा हैं , पुलिस वाले उनसे क्यों पंगा लेकर अपनी जान को आफत मोल ले ? ये हिंदुस्तान की पुलिस है मियां , जब तक प्रेसर न हो काम ही नहीं कर पाती ....अब गुलदार के भाई बन्दों का न तो कोई वोट है और न ही उनकी हिमायत में कोई नेता आएगा और न ही गुलदार के परिवार वाले कोई घुस रिश्वत देकर पुलिस को अपना काम याद दिला पाएंगे ...गुलदार के लिए जिम्मेदार वन विभाग भी महज अपने बजट को ठिकाने लगाने से ज्यादा बहार की बात नहीं सोचेगा ! ...ऐसे में एक अकेले गोविन्द और उनके हम जैसे सौ पांच सौ फोल्लोवर नेट पे ब्लॉग लिखकर अपनी खीज ही मिटा पाएंगे ......
    chandan bangari reporter
    dainik hindustan, ramnagar

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  7. yar ye kuon he itna shatir crimnal?? jiski shaan me itne kaside pare ja rahe he...... kuchh to khulasa karwao yar!!!!!

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  8. जज एक तरफ तो वन विभाग और पुलिस वन्य जिव तस्कर पर अंकुस लगाने के लिए रुपरेखा बना रहे है. उधर पुलिस गुलदार खाल मामले में सब कुछ जानते हुए भी अनजान बनी हुई है. वन विभाग भी इस मामले में पूरी तरह अनजान बना है. पूछने पर वो पुलिस द्वारा जांच करने की बात कह कर अपना पल्ला jhaarta दिखाई देता है. दोनों में से किसी को चिंता नहीं है की आखिर खाल कहा से आई; क्या किसी को फसाने के लिए गुलदार को मारा गया; या आरोपी के तस्करों से तो सम्बन्ध नहीं है. ये कई ऐसे सवाल है. जो अब पुलिस व वन विभाग की उदासीनता के चलते केवल सवाल ही बनकर रह जायंगे l अब ऐसे मे वन्य जीवो की सुरक्षा की बात करना तो बेमानी ही होगी

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  9. इस सुंदर से चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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  10. Nandan Singh Negi- govind ji this is india .all officer says janch chal rahi h..... dek rahe h.....mamla 6 month me samne aa jayega.....fir uska transfar ho jata h.kisko padi h park bhchane ki....sab pesa khane me lage h.TIGER BACHAO samiti ne kuch sujaw diye tha what happen.koi sunne wala nahi h.SAB KO MILKAR LADAI LADNI HOGI. TIGER BACHAO........
    September 13 at 10:27am · Like

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